Trikalik Prathna
ЁЯзШ Category: Puja
ЁЯУЕ 04/12/14
भगवान श्री कल्कि की त्रैकालिक प्रार्थना
अनुभव के क्षीरसागर में महर्षि बालमुकुन्द/हनुमान जी के आवेशावतार व पंडित लक्ष्मी नारायण/रामकृष्ण परमहंस के अवतार के साथ भक्तगण कलियुग नाशार्थ भगवान की त्रैकालिक प्रार्थना करते थे। सब से अनुरोध है कि प्रतिदिन कम-से-कम एक या दो बार सपरिवार या अकेले त्रैकालिक प्रार्थना अवश्य करें।
*श्री गणेशजी महाराज को दण्डवत्। *श्री गुरुजी महाराज को दण्डवत्। *श्री सरस्वती महारानी जी को दण्डवत्। *हे कल्कि भगवान, त्राहि मां त्राहि मां त्राहि मां। *हिन्दू धर्म की लज्जा रखिये। *विरद बाने की लज्जा रखिये। गौ ब्राह्मणों की रक्षा कीजिये। *साधु संतों की रक्षा कीजिये। *पृथ्वी की रक्षा कीजिये। *देवताओं की रक्षा कीजिये, पालना कीजिये। *राज्य सिंहासन पर विराजमान होइये। *महासत्युग कीजिये। यज्ञ हवन करवाइये। *पथ्वी का भार उतार दीजिये। *हे शरणागत् वत्सल जल्दी सुधि लीजिये, पल भर की देर न कीजिए। *त्राहिमाम् त्राहिमाम्। *गौ ब्राहमणों की रक्षा कीजिये।
हे नाथ! अब आपके दरबारी सखा लोग अत्यन्त थक गए हैं। अब इनमें किसी प्रकार की सामर्थ्य नहीं रही है। हे दीनबंधु, दीनानाथ अब इनकी जल्दी सुधि लीजिए। हमें गुरण्ड (अंग्रेजियत) के ताप से बचाइए। हमारी विनती सहस्त्र कान करके सुनिए। बारह टोपी म्लेच्छों का बीज नाश कर दीजिए। प्राचीन वाहन, भूषण, शक्ति, हथियार दरबारी सखा लोगों की दीजिए। खड्ग के जोर से इन्द्रप्रस्थ का तख्त आबाद की दीजिए। चौतरफ के बंद एकदम तोड़ दीजिए। चौतरफा महाघोर संग्राम कर दीजिए। हे नाथ! जब वाराह रूप धारण कर, हिरण्याक्ष को मार कर, पृथ्वी को डाढ़ा पर धर कर लाए और पृथ्वी को जल पर स्थापित करके पृथ्वी पर प्रसन्न होकर बोले थे कि ‘हे पृथ्वी, जब-जब दुष्ट असुर तुझ पर उत्पन्न होकर महापाप करेंगे, तब-तब मैं अवतार धारण कर तेरा भार एक दम उतार दूँगा।‘
हे नाथ! जो वचन आप पृथ्वी को दे चुके है, उन वचनों की पालना कीजिए। जैसा घोर महापाप का भार इस समय है, वैसा भार न रामावतार में हुआ, न कृष्णावतार में हुआ, फिर आप क्यों नहीं प्रकट होते! सिवाय आपके किसकी सामर्थ्य है जो पृथ्वी का भार उतार सके! हमेशा आप ही भार उतारते आये हैं, अब भी आप ही भार उतारेंगे।
हे नाथ! जैसे आपने गज को ग्राह से बचाया, लाक्षाकोट में जलते हुए पांडवों को बचाया कौरवों की सभा में द्रोपदी का चीर बढ़ाया, रुक्मणि का प्रण पूरा किया, वैसे ही है! दीनबन्धु, दीनानाथ, शरणागत वत्सल कल्कि भगवान, इस घोर समय में हमारी सुधि लीजिए। राज सिंहासन पर विराजमान होइए। महासत्युग कीजिए। यज्ञ-हवन करवाईए। पृथ्वी का भार उतार दीजिए।
हे नाथ! अब आप जैसे सोते से जागे हैं! सारी पृथ्वी के दुष्ट असुरों का बीज नाश कर दीजिए। हे कल्कि भगवान, दुर्गादेवी महारानी जी को शीघ्र आज्ञा दीजिए, जिससे सारी पृथ्वी के दुष्ट-असुरों का बीजनाश हो जाए।
हे कल्कि भगवान! आपने जो दृष्टान्त दिये हैं उन्हें अत्यन्त शीघ्र प्रत्यक्ष में सत्य कर दीजिए। देवापि और मरु नाम के जो राजा आपके लिए तप कर रहे हैं उन्हें अत्यन्त शीघ्र बुलवाइये। हे कल्कि भगवान! जितने भी आपके भक्त हैं उनके मन, बुद्धि, वाणी को अपनी ओर लगा लीजिए। उनसे अपना काम लीजिए और उनको ऐसी दृष्टि दीजिए जिससे वे निर्भय होकर जीवन पर्यन्त आपका काम करें।
*जय-जय श्री कल्कि भगवान महाराज की जय हो- *भूमि के भार उतार हारे की जय हो- *पद्मावति के पति महाराज की जय हो - *जगतपत के पति महाराज की जय हो - *संभल सरकार स्वामी की जय हो - *खड्गधारी कृपाकारी श्री कल्कि भगवान की जय हो - *भारतवर्ष में से गौ वध बन्द कराने वाले की जय हो- *पृथ्वी की गौवों की रक्षा करने वाले श्री कल्कि भगवान की सदा जय हो - *निरंकार ज्योति स्वरूप श्री कल्कि भगवान की सदा जय हो - *क्षीरसागरवासी श्री कल्कि भगवान की सदा जय हो।
हरि ॐ तत्सत् – हरि ॐ तत्सत् – हरि ॐ तत्सत्
ॐ नमो ब्रह्यण्य देवाय गौ ब्राह्मण हिताय च जगद्विताय
श्री कृष्णाय श्री कल्कि रूपाय नमो नम:
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