Pitra Dosh Nivaran

ЁЯзШ Category: Daan ЁЯУЕ 04/12/14

पितृ दोष निवारण हेतु

पित्रों के नियमित तर्पण के साथ नीचे लिखी विधि अपनाऐं-

16 सोमवार के व्रतों का कल्कि जी के निमित्‍त संकल्‍प लें वैसे तो सोमवार के व्रत शंकर जी के निमित्‍त किये जाते हैं किन्‍तु पितृ दोष निवारण के लिये कल्कि जी के निमित्‍त सोमवार के व्रत किये जाते हैं। व्रत में सवेरे स्‍नान करके पास के शिवालय में जाकर जल चढ़ाएं, एक समय भोजन ग्रहण करें। प्रसाद चढ़ाने में खोए की बर्फी न लें।

व्रत का फल समर्पण – हे कल्कि भगवान्, मैने जो यह व्रत किया है इसे स्‍वीकार कीजिए। इसका जो भी फल है उसे मेरे पित्रों को जिसको जैसी जरूरत है दिलवा दीजिए और मेरे पितृ दोष को दूर करते हुए (जो भी परेशानी है बोलें) मेरी परेशानी को दूर करें, मुझे रास्‍ता दें।

यदि बन पड़े तो प्रत्‍येक अमावस पर सौ ग्राम उड़द की दाल की पिट्ठी का एक गोला “सांभर बड़ा वाला” बनाकर बीच में जगह बना दें और उसमें छोटी करछी से तीन बार दूध डालते हुए कहें “ओम् पितृ तृप्‍ताय नम:”

प्रार्थना: हे स्‍वधा महारानी, मेरे पितृों को तृप्‍त कीजिए, उन्‍हें कल्कि जी के कार्यों की ओर अग्रसर कीजिए, हमें रास्‍ता दीजिए, हमें स्‍वस्‍थ शरीर से सपरिवार सुखी भाव से वैभवतापूर्वक कल्कि जी के प्रचार का कार्य करना है। फिर इसे पीपल के पेड़ पर या यमुना जी में चढ़ा दें। इससे आपको परिवार, व्‍यापार में धन की विशेष वृद्धि मिलेगी।

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